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जदयू में नई सियासी बिसात: निशांत कुमार की एंट्री से तेज हुई उत्तराधिकार की चर्चा, संजय झा के आवास पर युवा विधायकों की अहम बैठक

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पटना: बिहार की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में रविवार को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर जदयू के युवा विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें पहली बार मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। इस मुलाकात ने राज्य की सियासत में नई बहस को जन्म दे दिया है और इसे जदयू के भीतर संभावित नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज है कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए दिल्ली जाते हैं, तो बिहार में जदयू की कमान किसके हाथ में होगी। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में संजय झा के आवास पर हुई यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इस बैठक के जरिए पहली बार निशांत कुमार को सीधे तौर पर पार्टी के युवा विधायकों के साथ संवाद का मौका मिला। राजनीतिक हलकों में इसे एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसके जरिए पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर माहौल तैयार किया जा रहा है।
बैठक में जदयू के करीब दो दर्जन युवा विधायक मौजूद रहे। इनमें मंत्री श्रवण कुमार और जदयू एमएलसी संजय गांधी सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। युवा विधायकों में शुभानंद मुकेश, रूहेल रंजन, एम. मृणाल, ललन सर्राफ, चेतन आनंद, कोमल सिंह, समृद्ध वर्मा, अतिरेक कुमार, राहुल सिंह और वशिष्ठ सिंह जैसे नाम प्रमुख रूप से बैठक में उपस्थित रहे। बताया जा रहा है कि इस दौरान संगठन की भविष्य की रणनीति, पार्टी के विस्तार और आने वाले राजनीतिक हालात को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक बैठक का माहौल काफी सकारात्मक रहा और युवा विधायकों ने निशांत कुमार का स्वागत करते हुए उन्हें सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया। कई विधायकों ने यह भी कहा कि पार्टी के संस्थापक नेता नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। बैठक के अंत में सभी नेताओं ने एक साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई, जिसे राजनीतिक विश्लेषक एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संजय झा के आवास पर आयोजित यह बैठक महज एक सामान्य मुलाकात नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत छिपा है। दरअसल, निशांत कुमार जल्द ही औपचारिक रूप से जदयू की सदस्यता लेने वाले हैं। उससे पहले पार्टी के युवा विधायकों के साथ उनका संवाद यह दर्शाने की कोशिश माना जा रहा है कि जदयू के भीतर उनके लिए समर्थन का आधार तैयार किया जा रहा है।
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी संकेत दिया है कि पार्टी में शामिल होने के बाद निशांत कुमार बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद स्थापित करेंगे। यह वही राजनीतिक शैली होगी, जिसके जरिए नीतीश कुमार ने वर्षों तक संगठन को मजबूत बनाए रखा। इस बीच पटना स्थित जदयू कार्यालय के बाहर भी निशांत कुमार के स्वागत में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में “विकसित बिहार के नए अध्याय की शुरुआत – निशांत कुमार” जैसे नारे लिखे गए हैं, जो पार्टी के भीतर नई राजनीतिक पारी की आहट दे रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष भी लगातार निशाना साध रहा है। राष्ट्रीय जनता दल समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि जदयू अब परिवारवाद की राह पर बढ़ रही है। विपक्ष यह सवाल भी उठा रहा है कि जो नीतीश कुमार लंबे समय तक परिवारवाद की राजनीति की आलोचना करते रहे, उनकी पार्टी में अब उसी तरह का प्रयोग क्यों किया जा रहा है।
बहरहाल, बिहार की सियासत में यह साफ संकेत मिलने लगे हैं कि आने वाले दिनों में जदयू के भीतर नेतृत्व को लेकर नई तस्वीर उभर सकती है। संजय झा के आवास पर हुई यह बैठक फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है और माना जा रहा है कि निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री के साथ ही बिहार की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर सकती है।

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